Apna Thought- पढ़ते रहिए, आगे बढ़ते रहिए।

शनिवार, 13 फ़रवरी 2021

किताबों के फायदे | benefits of reading | importance of books | Apna Thought |

 किताबों के फायदे | benefits of reading | importance of books | Apna Thought |


    आपने books, किताबें ये शब्द सुने ही होंगे। ज्यादा तर लोगों का कहना है कि रात में किताबे पढ़ने से नींद जल्दी और अच्छी आती है। लेकिन दोस्तों क्या किताबें इसी के लिए पढ़ी जाती है?

     नही... बिल्कुल नही। किताबों को इस लिए नही पढ़ा जाता कि नींद जल्दी आये और अच्छी आये। लोगों की इसी गलतफहमी को दूर करने और किताबों के फ़ायदे आपको बताने के लिए इसे लिख रहा हु। आशा करता हु आगे पूरा लेख पढ़ने के बाद आप किताबें अपनी Knowledge बढ़ाने के लिए, खुद को Motivate करने के लिए पढ़ेंगे।

   दोस्तों,

     Books आपके जीवन मे एक Important Role अदा करते है। शुरू के दिनों में वो आपके Education में अहम हिस्सा निभाते है। उसके बाद उन किताबों को पढ़ाई के साथ General Knowledge पाने के लिए, Competitive exams की तैयारी करने के लिए पढ़ना शुरू करते है। उसी के साथ Movies जैसा feel , Thrill का अनुभव करने के लिए भी आप पढ़ सकते है। अगर आप कभी ज़िंदगी मे हरा हुआ मेहसूस करते है, कभी निराश होते है। तो ये किताबे आपको उससे निकालकर उम्मीद देने का काम करते है।

     देखिए, आप किताबों को सिर्फ education का माध्यम समझेंगे, सिर्फ शिक्षा के लिए उपयोग मात्र समझना उनकी चेष्टा है, उनका अपमान है। अगर कभी आप उन्हें दोस्त बनाये तो ये दोस्त कभी आपका साथ नही छोड़ेगा। अजब प्रेम की गजब कहानी (APKGK) movie में एक line है- किताबें ऐसी दोस्त होती है जो साथ निभाती है बिना किसी शर्त के ,बिना किसी अपेक्षा के (Without any Condition, without any expectation) ।

     दोस्तों, दुनिया मे करोडों किताबे है, हजारो भाषा मे उन्हें लिखा गया है। एक उम्र नही सौ बार जन्म लेकर भी उन्हें पढ़ पाना मुमकिन नही और जब तक पढ़ रहे है, तब तक और करोड़ो, अरबों किताबें और लिखी जाएगी। आशा करता हु आप किताबें जरूर पढ़ेंगे, दोस्तों एक बार शुरू तो करे। पढ़ेंगे दोस्तो तभी तो आगे बढ़ेंगे।

तो पढ़ते रहिये, आगे बढ़ते रहिये।

शुक्रवार, 4 दिसंबर 2020

नागाओं का रहस्य| The Secret Of Nagas | Amish Tripathi | Shiva Trilogy | Book Review | Amazon Kindle

नागाओं का रहस्य | The Secret Of Nagas | Amish Tripathi | Shiva Trilogy | Book Review | Amazon Kindle


गलत हुआ फैसला तेरा,

लेकिन हिम्मत अभी बाकी है।

उठ, फिर लढ तू,

असली अभी बाकी है।

नही छोड़ सकता लढाई यही

क्योंकि शैतान अभी बाकी है।

कर देगा विनाश तू,

तो सिर्फ भगवान कहना बाकी है।

https://youtu.be/qIrp59cdsOc


   दोस्तों अपने गलतियों से सीखकर हमे आगे बढ़ना होता है और अपने कार्यों को मंजिल तक ले जाना होता है। कोई अच्छा कार्य करते वक़्त , अपनी तय की हुई मंजिल तक पहुंचते हुए कुछ फैसले गलत हो सकते है। लेकिन गलतियों से आगे बढ़कर हमे अपना रास्ता बनाना होता है। कोई भी दुनिया मे यू ही सफल नही होता है, उसके पीछे की गई मेहनत सफलता का राज बनती है। आज ऐसी ही एक Motivational किताब की जानकारी में देने वाला हु। अमिश त्रिपाठी(Amish Tripathi) द्वारा लिखी गई "Shiva Trilogy Series" की दूसरी किताब "नागाओं के रहस्य"( The Secret Of Nagas) के बारे में आपको जानकारी दूंगा।

   दोस्तों पिछली Post  में मैंने आपको "Shiva Trilogy Series" कि पेहली किताब "मेलुहा के मृत्युंजय" (The Immortals Of Meluha) में सरदार शिवा का भगवान बनने का सफर शुरू हुआ था। इस किताब में वहा से आगे की कहानी बताई गई है। सती और शिवा- दोनों लोकनायक की और से हुए हमले से बच जाते है। इस हमले की वजह से, साथ मे बृहस्पति पर हुआ हमला और मगध के राजकुमार की हत्या ऐसे कई कारणों से शिवा नागलोक की तलाश का फैसला लेते है। साथ मे पंडितों से हो रही बातचीत में शिवा असली शैतान को पहचान करने की कोशिश करते है।

   अगला पड़ाव काशी की पवित्र भूमि पर लिया जाता है। वहा सती और शिवा के पुत्र कार्तिक का जन्म होता है। जन्म के दौरान शिवा को पता चलता है कि ब्रंग राज्य को नागलोक से मदत मिलती है। वहा से शिवा अकेले ब्रंग राज्य की ओर निकल जाते है। वहा परशुराम जैसा योद्धा भक्त उन्हें मिलता है। लेकिन उससे पहले बड़ी घमासान लढाई भी होती है। वही दूसरी ओर सती और कार्तिक दोनो काशी में थे। उसी दौरान काशी के गांव को बचाने के लिए सती छोटे सैनिक टुकड़ी के साथ वहा पहुंचती है। गांव में हुए हमले में पशु लढाई में हावी होने लगते है। उसी वक्त लोकनायक और नागलोक की रानी वहा सती को बचाते है। 

   नागलोक के लोकनायक और रानी की मुलाकात में सती को बीते हुए जीवन की सच्चाई का पता चलता है। सती और शिवा इस रहस्य को जानने के बाद आश्चर्यचकित हो जाते है। लेकिन शिवा अपने मित्र बृहस्पति की हत्या के कारण उनपर विश्वास नही करते है। ऐसे में शिवा को विश्वास दिलाने हेतु सभी नागलोक जाने का फैसला करते है। शिवा अपने परिवार और साथियों के साथ नागलोक पहुंचते है। वहा अचानक से उनपर हमला होता है। लढाई में शिवा जीत जाते है। लेकिन हमले की सच्चाई समझने के बाद और वहा हुई एक व्यक्ति की मुलाकात से सभी आश्चर्य से भर जाते है। यही पर दूसरी किताब का अंत होता है। 

   दोस्तों, "The Secret Of Nagas" की छोटीसी पहचान से आपको इसकी रोचकता का अंदाज़ा तो आया ही होगा। इस किताब में सुर्यवंशी(Suryavanshi) जैसे संपन्न राज्य के खोखलेपन का रहस्य उजागर होता है। उसी के साथ मैका और नागलोगों के पहचान जैसे रहस्य, साथ मगध, काशी, ब्रंग और नागलोक के राज्य में सफर करते हुए उनके जीवन पद्धति की पहचान होती है।

   तो अमिश त्रिपाठी जी के इस लेखन को, उनके रहस्यमय रचना को आपको जरूर पढ़ना चाहिए। मैने आगे Links दी है-

English - https://amzn.to/3lavT6L

हिंदी- https://amzn.to/2HDaQMa

   यहा से आप खरीदकर जरूर पढ़ें। आशा करता हु आपको ये जानकारी पसंद आई होगी। अगर पसंद आये तो share जरूर करे। आप ये जानकारी वीडियो में देखने के लिए मेरे YouTube Channel - Apna Thought पर जरूर भेट दे। 

गुरुवार, 5 नवंबर 2020

मेलुहा के मृत्युंजय | The Immortals of Meluha | Amazon Book Review in Hindi |

"द इम्मोर्टल्स ऑफ मेलुहा" का सारांश: शिव की पौराणिक यात्रा


अमीश त्रिपाठी की पुस्तक "द इम्मोर्टल्स ऑफ मेलुहा" (The Immortals of Meluha) भारतीय पौराणिक कथाओं पर आधारित एक शानदार कल्पना है, जो शिव त्रयी (Shiva Trilogy) की पहली किताब है। यह किताब न केवल भगवान शिव की कहानी को एक नए रूप में प्रस्तुत करती है, बल्कि एक प्राचीन सभ्यता की गहराई, उनकी चुनौतियों और संघर्षों को भी दर्शाती है। अमीश ने भारतीय पौराणिकता को एक काल्पनिक परिप्रेक्ष्य में पुनः रचा है, जो एक आदर्श समाज की समस्याओं और उसके उद्धारकर्ता की यात्रा पर आधारित है। यह कहानी मानवीय गुणों और दोषों पर ध्यान केंद्रित करते हुए भगवान शिव को एक सामान्य मानव के रूप में पेश करती है, जो धीरे-धीरे देवत्व की ओर अग्रसर होते हैं।



कहानी की पृष्ठभूमि

कहानी 1900 ईसा पूर्व में मेलुहा नामक एक आदर्श राज्य में घटित होती है। मेलुहा को लेखक ने भगवान राम के अनुयायियों द्वारा स्थापित एक परिपूर्ण राज्य के रूप में दिखाया है, जो अत्यधिक अनुशासित और सुव्यवस्थित है। यहाँ के लोग सोमरस नामक एक अमृत जैसे पेय का सेवन करते हैं, जो उन्हें लंबी उम्र और स्वास्थ्य प्रदान करता है। लेकिन मेलुहा को अब कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है – सोमरस की आपूर्ति में कमी और चंद्रवंशियों द्वारा हो रहे हमले।

चंद्रवंशी और नागा मेलुहा के शत्रु हैं, जो मेलुहा की शांति और सुरक्षा के लिए खतरा हैं। मेलुहावासी मानते हैं कि उनका उद्धार केवल एक मसीहा द्वारा किया जा सकता है, जिसे "नीलकंठ" कहा गया है। नीलकंठ का प्राचीन भविष्यवाणी में उल्लेख है, जिसके अनुसार यह व्यक्ति ही मेलुहा को बुराई से बचाएगा और समाज में शांति और न्याय स्थापित करेगा।

मेलुहा के मृत्युंजय | The Immortals of Meluha | Amazon Book Review in Hindi |


शिव का आगमन

मुख्य पात्र, शिव, तिब्बत के कैलाश पर्वत के पास के एक गोत्र के मुखिया हैं। शिव और उनके गोत्र के लोग निरंतर संघर्ष और युद्ध से थक चुके हैं। ऐसे में मेलुहा के अधिकारी नंदी शिव और उनके गोत्र को मेलुहा आने का निमंत्रण देते हैं, जहां उन्हें शांति और समृद्धि का वादा किया जाता है। मेलुहा में आने के बाद, शिव और उनके गोत्र के लोग सोमरस का सेवन करते हैं। शिव के शरीर में यह सोमरस एक असामान्य प्रतिक्रिया उत्पन्न करता है और उनके गले का रंग नीला हो जाता है। इस घटना के बाद, शिव को "नीलकंठ" के रूप में पहचाना जाता है, और मेलुहावासी उन्हें अपने मसीहा के रूप में स्वीकार कर लेते हैं।

शिव का संघर्ष और यात्रा

शिव, जो अब नीलकंठ की भूमिका में हैं, इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि क्या वे सच में वह मसीहा हैं, जिसकी भविष्यवाणी की गई थी। वे अपनी मानवता और इस महिमामंडित भूमिका के बीच फंसे हुए महसूस करते हैं। मेलुहा के लोग उन्हें भगवान के रूप में देखना शुरू कर देते हैं, लेकिन शिव को यह समझने में समय लगता है कि उनकी भूमिका केवल शारीरिक बल से नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण है।

इस दौरान, शिव की मुलाकात सती से होती है, जो मेलुहा के राजा दक्ष की बेटी हैं। सती एक महान योद्धा हैं, लेकिन उनके जीवन में कई सामाजिक बाधाएं हैं, क्योंकि वे "विकर्म" (अशुभ) मानी जाती हैं। शिव और सती के बीच धीरे-धीरे प्रेम विकसित होता है, और सती शिव के जीवन में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति बन जाती हैं, जो उन्हें उनकी भूमिका और जिम्मेदारी को समझने में मदद करती हैं।

चंद्रवंशी और नागाओं के साथ संघर्ष

कहानी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मेलुहा और चंद्रवंशियों के बीच का संघर्ष है। मेलुहावासी चंद्रवंशियों को बुराई का प्रतीक मानते हैं, जबकि चंद्रवंशी मेलुहावासियों को क्रूर और अत्याचारी मानते हैं। शिव को धीरे-धीरे यह एहसास होता है कि अच्छाई और बुराई की अवधारणाएं व्यक्ति के दृष्टिकोण पर आधारित होती हैं। चंद्रवंशी, जिन्हें मेलुहावासी राक्षस मानते हैं, वास्तव में उतने बुरे नहीं हैं, जितना उन्हें बताया गया था।

शिव के नेतृत्व में, मेलुहावासी चंद्रवंशियों के खिलाफ युद्ध के लिए तैयार होते हैं। इस दौरान, शिव को यह भी पता चलता है कि नागा, जो चंद्रवंशियों के सहयोगी माने जाते हैं, विकृत और खतरनाक योद्धा हैं, लेकिन उनके बारे में कई रहस्य छिपे हुए हैं, जो शिव को आगे की यात्रा में समझ में आते हैं। नागा सभ्यता का रहस्य और उनकी भूमिका कहानी को और जटिल और रहस्यमय बनाती है।

शिव की आंतरिक यात्रा

जहाँ एक ओर शिव बाहरी खतरों से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनके भीतर भी एक संघर्ष चल रहा है। उन्हें यह समझ में आना शुरू होता है कि केवल शारीरिक युद्धों से संसार को नहीं बदला जा सकता। अच्छाई और बुराई की रेखाएं धुंधली हो जाती हैं, और उन्हें यह जानने की जरूरत होती है कि किसके साथ लड़ना है और किसके खिलाफ। यह आंतरिक यात्रा शिव को एक साधारण मानव से एक महान नेता और दार्शनिक की ओर ले जाती है।

शिव का सबसे बड़ा संघर्ष खुद को "नीलकंठ" के रूप में स्वीकारने का होता है। वह अपनी किस्मत को लेकर सवाल करते हैं, क्या वे वास्तव में मसीहा हैं या यह केवल एक संयोग है? वह यह भी समझते हैं कि उनकी भूमिका केवल एक योद्धा की नहीं, बल्कि एक विचारशील और नैतिक नेतृत्वकर्ता की है, जिसे समाज में बदलाव लाने के लिए सही फैसले लेने होंगे।


मुख्य विषय और संदेश

"द इम्मोर्टल्स ऑफ मेलुहा" का प्रमुख संदेश यह है कि अच्छाई और बुराई की अवधारणाएं समय, परिस्थितियों और व्यक्ति के दृष्टिकोण के अनुसार बदलती हैं। शिव का चरित्र इस जटिलता को दर्शाता है कि कोई भी व्यक्ति पूर्ण रूप से अच्छा या बुरा नहीं होता। यह पुस्तक कर्म, भाग्य और मानवता के बीच संतुलन की बात करती है, जहाँ शिव को यह समझ में आता है कि एक नेता का काम केवल युद्ध लड़ना नहीं है, बल्कि लोगों के जीवन को सही दिशा में मार्गदर्शन देना भी है।

अमीश त्रिपाठी ने भारतीय पौराणिक कथाओं को एक नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया है, जहाँ देवता भी इंसान होते हैं और इंसानों की तरह ही भावनाएं, सवाल और कमजोरियां होती हैं। शिव का चरित्र इसी मानवीयता को दर्शाता है, जहाँ वह अपने संघर्षों और गलतियों से सीखते हैं और अंततः एक महान नेता के रूप में उभरते हैं।

दोस्तो इस किताब को कई भाषाओं में लिखा गया है, आप इसे खरीदने के लिए - 

हिंदी    https://amzn.to/3Ajzf4I

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उपसंहार

"द इम्मोर्टल्स ऑफ मेलुहा" एक ऐसी पुस्तक है जो न केवल पौराणिक कथाओं के प्रेमियों को आकर्षित करती है, बल्कि इसमें मानवता, राजनीति, नैतिकता और दर्शन के सवाल भी उठाए गए हैं। यह कहानी शिव की एक साधारण मानव से लेकर देवता बनने की यात्रा को दर्शाती है, जिसमें वह समाज की जटिलताओं और अच्छाई-बुराई की धुंधली रेखाओं से रूबरू होते हैं।

अमीश त्रिपाठी ने इस पुस्तक के माध्यम से यह सिद्ध किया है कि भारतीय पौराणिक कथाएं आज भी कितनी प्रासंगिक हैं, और उन्हें एक नए और समकालीन दृष्टिकोण से भी देखा जा सकता है। "द इम्मोर्टल्स ऑफ मेलुहा" की सफलता इस बात का प्रमाण है कि यह न केवल एक रोमांचक काल्पनिक कहानी है, बल्कि इसमें भारतीय संस्कृति, परंपराओं और नैतिकता के गहरे संदर्भ भी निहित हैं।

   आशा करता हु आप जरूर किताब पढेंगे, आपको ये लेख कैसा लगा मुझे जरूर बताएं। साथ आप मुझसे जुड़ सकते है।

पढ़ते रहिए, आगे बढ़ते रहिए।