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रविवार, 4 मई 2025

पहलगाम की पुकार | Shayari on Pahalgam Attack | Pahalgam Terror Attack | Apna Thought |

Pahalgam | Pahalgam Terror Attack | पहलगाम

सपनों के आँगन में लाशें बिछ गईं,
हँसते हुए परिवार उजड़ गए।
सियासी खेल में इंसान,
दरिंदा बनकर खून से धरती सींच गए।

कौन सा मज़हब सिखाता है ये?
कि मासूमों की जान का सौदा हो।
कश्मीर किसका है—ये सवाल नहीं,
जवाब है, जहाँ ज़िंदा दिलों का भरोसा हो।

जिन आँखों ने बचपन में सिर्फ खिलौने देखे,
आज वही आँखें बारूदों की लकीरें पढ़ती हैं।
क्या दोष था उनका, जो लौट ना सके,
जिनकी चिताओं से अब हवा भी डरती है।

प्रत्येक चीख एक गवाही है,
इंसाफ की जो राह तकती है।
प्रतिकार हमें भी करना होगा,
क्योंकि चुप रहना अब कायरता की निशानी है।

शायद फिर कोई उजड़ जाए इस प्रयास में,
मगर ज़रूरी है इन वहशियों को सज़ा मिले।
निष्पाप जो बेवजह मारे गए,
उनके लिए अपना थोड़ा खून बहाना ज़रूरी है।
 
-Anayankoor

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रविवार, 30 मार्च 2025

बिन तुम्हारे लग रहा जीवन अधूरा है...!!! Without you, life remains an incomplete verse | Anayankoor | Apna Thought |

बिन तुम्हारे लग रहा जीवन अधूरा है...!!! Without you, life remains an incomplete verse | Anayankoor | Apna Thought |

बिन तुम्हारे लग रहा जीवन अधूरा है,
रात यहाँ, सुबह वहाँ, मन का सूरज छूरा है।
चाँदनी के बिन जैसे सन्नाटे का सफ़र हो,
हर साँस में उदासी, दिल मे दर्द और जीवन लगता जहर हो।

तुम जो मिलो तो खिल उठे फूल जैसे लहराते हो,
आँखों के सागर में सितारे नहाते हो।
दर्द की राहों में तुम्हारा नाम रोशनी है,
हर धड़कन तुमसे ही, जैसे तुम्ही को पुकारती हो।

तुम न हो तो ये दुनिया रेत का महल लगे,
सपने सब बिखरते, हवाओं में मतवाल लगे।
पर तुम्हारी एक मुस्कान जैसे सावन की फुहार,
मुरझाए पलों को फिर से हरा कर दे आधार।

बिन तुम्हारे लग रहा जीवन अधूरा है,
तुम हो तो हर घड़ी में मधुरता है।
तुम्हीं हो वो धागा जो इस दिल को सीये रखे है,
तुम्हारे बिन ये जग, एक खाली आईना है...
हर पल तन्हाई, सिर्फ यादों का सहारा है,
सच में बिन तुम्हारे लग रहा जीवन अधूरा है....!!!

-Anayankoor

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मुझे आज भी तेरा इंतज़ार है | I am still waiting for you | Anayankoor | Apna Thought |

शायरी: मुझे आज भी तेरा इंतज़ार है...


मुझे आज भी तेरा इंतज़ार है,
मेरी हर सांस तुझे पाने के सपने पे सवार है।

रात की निगाहें सहर से मिलने को तरसती हैं,
मगर तेरे बिन ये सुबह भी शाम-सी उदास है।

तन्हाइयों के जंगल में दिल बेज़ार है,
यहा तेरे नाम का साया ही मेरा किनारा है।

उम्मीदों की चिंगारी में जल रहे है हम,
और इस दिल को अब भी तेरे इकरार की प्यास है।

इश्क़ की ये कहानी है अज़ीमुश्शाँ अभी,
क्योंकि ये नजर देखती जा रही तेरी राह, बार बार है..!
कैसे कहू "मुझे आज भी तेरा इंतज़ार है...!"
 
-Anayankoor

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कहीं सुकून खो गया है मेरा...| Somewhere I have lost my peace of mind... | Anayankoor | Apna Thought |

कहीं सुकून खो गया है मेरा...| Somewhere I have lost my peace of mind | Anayankoor | Apna Thought |

 शायरी: कहीं सुकून खो गया है मेरा...

कहीं सुकून खो गया है मेरा,
जैसे धूप में छाँव खो गई हो...

दिल की बेचैनी ने ये दिखाया,
कि राहों में मंज़िल खो गई हो...

मुस्कान भी अजनबी-सी लगती है,
जैसे आँखों में आँसुओं का मेल खो गया हो...

खुद से ही जुदा-सा लगता हूँ मैं,
जैसे लोगों की भीड़ में कोई "अपना" खो गया हो...

ये दर्द भी अब साथ नहीं देता,
जैसे दर्द का भी हुनर खो गया हो...

रातों की नींद अब टुकड़ों में है,
जैसे सितारों से चाँद का रिश्ता खो गया हो...

पर ये तन्हाई भी तो देखो मेरी,
जो खो गया है टूटे ख्वाबों में छुपा है मेरा अफसाना,
जैसे उसे ढूँढ़ने का जज़्बा भी खो गया हो...

फिर भी ढूँढ़ता हूँ हर मोड़ पर,
कि कहीं तो मिलेगी वो छोटी-सी ख़ुशी जो खो गई हो...

-Anayankoor

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गुरुवार, 30 मार्च 2023

| | सीता राम | | मर्यादा पुरुषोत्तम राम | सीता | राम | Sita Ram | Maryada Purushottam Ram | Sita | Ram |

| |  सीता राम | | 

राम का जीवन, सीता का महत्व , लक्ष्मण का त्याग, हनुमान की भक्ति

राम जी के नाम के साथ हमे रावण भी तो याद आता है,

लंका में किया वो राक्षसों का संहार याद आता है.!


राम जी थे वो

जिन्होंने अपने राजपाट को एक पल में छोड़ दिया,

पिता के शपथ के लिए खुद का जीवन

वन की ओर मोड़ दिया.!


क्या सोचते हो तुम

की पिता तो शोक में चले गए,

फिर भी बेटा ना लौट आता है,

जरा गौर करोगे तो समझोगे

इस कठिन समय मे भी बेटा पिता का कर्ज चुकाता है.!


क्या राम जी के साथ तुम्हे कोई और याद आता है?

हनुमान और लक्ष्मण को इस सफर में कौन भूल पाता है..?


कर्ज पिता का तो भाई पर था,

फिर भी लक्ष्मण अपना संसार छोड़ चले थे...

भाई का साथ निभाने कदम से कदम मिलाये खड़े थे...!


साथ हनुमान का भी क्या खूब मिला था,

लंका को जो खुद अकेला रौंद आया था.!

भगवान के चरणों मे स्थान पाने एक वानर चल पड़ा था,

अपने भगवान के प्रतिशोध में वो रावण से लड़ पड़ा था.!


चलो ये दोनों तो वीर है,

हम सबके भी प्रिय है..!

लेकिन कुछ पूरा सा अभी ये सफर नही है,

कोई है जो पूरी बात में शामिल नही है..!


जीवन आपका हमे बहोत कुछ सिखाता है,

लेकिन एक बात है, एक फैसला है

जो दिल को नही भाता है.!

Ram ka Jivan, sita ka mahatv, laxman ka tyag, hanuman ki bhakti

संग संग आपके वो तो सब छोड़ चली थी,

पहले मायका फिर राजपाट भी

आपके प्रेम में लांघ गयी थी..!


जिस सीता के लिए आपने लंका में जाकर रावण को मारा था,

उसी सीता को आपने किसी के कहने पर क्यो धुत्कारा था..!


माना के आप को निभानी कुछ मर्यादा है,

जिस कारण ही आपका होता जयकार है...

लेकिन एक बात सच थी और रहेगी,

की सीता मैय्या का भी आप पर अधिकार है..!